पितृ दोष • कालसर्प दोष • मंगल/मांगलिक दोष
भात पूजा • ग्रहण दोष • गुरु चांडाल दोष

वैदिक ज्योतिष एवं शास्त्रोक्त विधि से विशेष दोष निवारण पूजन

कालसर्प दोष निवारण पूजा

कालसर्प दोष निवारण पूजन

कालसर्प दोष निवारण पूजन मुख्य रूप से भगवान शिव, नाग देवता और राहु-केतु की शांति के लिए किया जाता है। यह पूजन उज्जैन जैसे पवित्र स्थलों पर विशेष रूप से संपन्न की जाती है।

शुभ तिथियां

नाग पंचमी का दिन इस पूजन के लिए सबसे उत्तम माना गया है। इसके अलावा सावन मास, सोमवार और प्रदोष व्रत में भी यह पूजा बेहद फलदायी मानी जाती है।

यहाँ पितृदोष निवारण

पितृदोष निवारण पूजन

पितृ दोष निवारण पूजन मुख्य रूप से अमावस्या, पूर्णिमा, चतुर्दशी या पितृ पक्ष (श्राद्ध पक्ष) के दौरान योग्य पंडित के मार्गदर्शन में संपन्न किया जाता है।

मुख्य पूजा विधि और अनुष्ठान
  • संकल्प: पूजा के आरंभ में योग्य पंडित द्वारा पितृ दोष से मुक्ति पाने का संकल्प लिया जाता है।
  • तर्पण और पिंडदान: इसमें पवित्र जल, काले तिल, कुशा और चावल के पिंडों द्वारा पूर्वजों का आह्वान व तर्पण किया जाता है।
  • त्रिपिंडी श्राद्ध / हवन: ज्ञात-अज्ञात पितरों की शांति के लिए विशेष हवन और वैदिक मंत्रोच्चार किए जाते हैं।
यहाँ मंगल भात पूजा

मंगल/मांगलिक दोष निवारण भात पूजन

कुंडली में मंगल दोष (मांगलिक दोष) के निवारण के लिए उज्जैन के प्रसिद्ध मंगलनाथ मंदिर में पके हुए चावलों से की जाने वाली मंगल भात पूजा प्रमुख वैदिक अनुष्ठानों में मानी जाती है।

मंगल भात पूजा का महत्व

दोष शांति: जब मंगल कुंडली के पहले, चौथे, सातवें, आठवें या बारहवें भाव में हो, तब यह पूजा मंगल की उग्रता और उष्णता को शांत करने के उद्देश्य से की जाती है।

विवाह बाधा दूर होना: विवाह में आ रही अड़चनों, देरी या वैवाहिक जीवन के क्लेश को दूर करने के लिए मंगल भात पूजा की जाती है।

ग्रहण दोष निवारण पूजन

ग्रहण दोष निवारण पूजन

कुंडली में सूर्य या चंद्रमा के साथ राहु या केतु की युति होने पर ग्रहण दोष बनता है, जिसके निवारण के लिए विशेष पूजा-पाठ और उपाय किए जाते हैं।

ग्रहण दोष निवारण पूजा की विधि
  • संकल्प व पूजन: किसी योग्य पंडित द्वारा स्वस्ति वाचन, शांति पाठ और गणेश पूजन के साथ अनुष्ठान का संकल्प लिया जाता है।
  • स्थापना: कलश स्थापना, नवग्रह और माता लक्ष्मी का पूजन किया जाता है तथा ग्रहण दोष निवारण यंत्र स्थापित होता है।
  • मंत्र जाप व हवन: पीड़ित ग्रह (सूर्य या चंद्र) के बीज मंत्रों के साथ राहु या केतु के मंत्रों का निर्धारित संख्या में जाप और अंत में हवन किया जाता है।
गुरु चांडाल दोष निवारण

गुरु चांडाल दोष निवारण पूजन

गुरु चांडाल दोष निवारण पूजा कुंडली में गुरु और राहु (या केतु) की युति के प्रभावों को शांत करने के उद्देश्य से की जाती है। इस वैदिक अनुष्ठान के माध्यम से मानसिक शांति और कार्यों में आ रही बाधाओं के निवारण के लिए पूजा की जाती है।

पूजा की मुख्य विधि
  • संकल्प: योग्य पंडित द्वारा गणेश पूजन और जातक के नाम व गोत्र से संकल्प लिया जाता है।
  • कलश स्थापना: भगवान गणेश, शिव, नवग्रह और प्रधान देवताओं की स्थापना व पूजा होती है।
  • हवन (होमम): घी, तिल, जौ और पवित्र सामग्री से दशांश हवन संपन्न किया जाता है।

नवग्रह जप संख्या तालिका


नवग्रह जप

पण्डित कान्‍हा जोशी

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